पंचांग आधारित
✂️

मुंडन मुहूर्त 2026

मुंडन (चूड़ाकर्म) शिशु का पहला केश मुंडन संस्कार है, जो सामान्यतः जीवन के पहले या तीसरे वर्ष में किया जाता है। यह सोलह हिंदू संस्कारों में से एक है और माना जाता है कि यह जन्म की अशुद्धियों को दूर करता है, मानसिक शक्ति देता है और शिशु को स्वास्थ्य का आशीर्वाद देता है।

तिथि, नक्षत्र और शुभ समय देखें

हमारे शुभ मुहूर्त टूल में महीना और उद्देश्य चुनें और विस्तृत जानकारी पाएं।

मुहूर्त देखें

मुहूर्त चुनते समय क्या देखें?

1.

आयु: मुंडन परंपरागत रूप से शिशु के 1, 3 या 5 वर्ष की आयु में (विषम वर्षों में) किया जाता है।

2.

नक्षत्र: हस्त, रोहिणी, पुष्य और उत्तर फाल्गुनी मुंडन के लिए शुभ हैं।

3.

वर्जित: कई परिवारों में चातुर्मास (जुलाई–अक्टूबर) के दौरान मुंडन परंपरागत रूप से नहीं किया जाता।

4.

वार: सोमवार, बुधवार और गुरुवार संस्कार के लिए शुभ माने जाते हैं।

5.

पवित्र स्थल: कई परिवार तिरुपति या नासिक जैसे मंदिर या तीर्थ स्थल पर मुंडन करते हैं।

6.

मुंडन किए गए बाल परंपरागत रूप से नदी या पवित्र जल स्रोत को अर्पित किए जाते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मुंडन किस उम्र में होना चाहिए?

परंपरागत रूप से मुंडन जीवन के 1वें, 3वें या 5वें वर्ष में किया जाता है। सबसे सामान्य 1वाँ वर्ष (जब शिशु बैठ सके) या 3रा वर्ष है। कुछ परिवार अपनी क्षेत्रीय परंपराओं का पालन करते हैं।

क्या मुंडन घर पर हो सकता है?

हाँ, मुंडन पंडित के साथ घर पर किया जा सकता है। कई परिवार मंदिर में भी करते हैं, विशेष रूप से तिरुपति, काशी या नासिक जैसे पवित्र स्थलों पर।

क्या चातुर्मास में मुंडन नहीं करना चाहिए?

कई परिवार परंपरागत रूप से चातुर्मास (लगभग जुलाई से अक्टूबर) के दौरान मुंडन से बचते हैं। हालांकि, क्षेत्र और परिवार की परंपरा के अनुसार प्रथाएं भिन्न होती हैं।

मुंडन के बाल का क्या करें?

बाल परंपरागत रूप से किसी पवित्र नदी, जल स्रोत में विसर्जित किए जाते हैं या मंदिर में अर्पित किए जाते हैं। पारंपरिक रीति के अनुसार इन्हें लापरवाही से नहीं फेंकना चाहिए।

अस्वीकरण: यह जानकारी पंचांग डेटा और पारंपरिक गणनाओं पर आधारित है। महत्वपूर्ण संस्कारों के लिए कृपया किसी योग्य पंडित से परामर्श अवश्य लें।