उगादि 2026: तेलुगु और कन्नड़ नव वर्ष — तिथि, पचड़ी और परंपराएं
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उगादि 2026: तेलुगु और कन्नड़ नव वर्ष — तिथि, पचड़ी और परंपराएं

उगादि तेलुगु और कन्नड़ नव वर्ष है, जो चैत्र शुक्ल प्रतिपदा — चैत्र माह के शुक्ल पक्ष के पहले दिन — मनाया जाता है। 2026 में उगादि 29 मार्च को है। संस्कृत में "युग" (काल) और "आदि" (आरंभ) से बना यह नाम नए युग की शुरुआत का प्रतीक है। इस त्योहार की विशेषता है उगादि पचड़ी — जीवन के छह स्वादों का प्रतीक — और पंचांग श्रवण परंपरा।

उगादि 2026: 29 मार्च (रविवार) · सत्यापित क्षेत्रीय डेटा

उगादि

सत्यापित क्षेत्रीय डेटा
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उगादि 2026

29 मार्च 2026 (रविवार)

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तिथि

चैत्र शुक्ल प्रतिपदा

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पंचांग श्रवण

29 मार्च 2026 — मंदिरों में वार्षिक पंचांग वाचन

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क्षेत्र

आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, भारत

स्रोत: सत्यापित क्षेत्रीय डेटा · अंतिम समीक्षा: 2026-06-06
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उगादि के बारे में

उगादि आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक में हिंदू चंद्र नव वर्ष की शुरुआत का उत्सव है। यह गुड़ी पड़वा (महाराष्ट्र) के साथ ही मनाया जाता है और शालिवाहन शक कैलेंडर के नव वर्ष का प्रतीक है। उत्सव सूर्योदय से पहले तेल स्नान से शुरू होता है, फिर पूजा, उगादि पचड़ी का स्वाद, नए वस्त्र और मंदिरों में पंचांग श्रवण होता है।

उगादि का महत्व

हिंदू परंपरा के अनुसार, उगादि वह दिन है जब ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना शुरू की — इसलिए यह सृष्टि का प्रथम दिन माना जाता है। यह शालिवाहन शक कैलेंडर का पहला दिन है, जो दक्षिण और मध्य भारत में धार्मिक कार्यों के लिए प्रयोग किया जाता है।

उगादि पचड़ी इस त्योहार की सबसे विशिष्ट परंपरा है — छह सामग्रियों से बना एक विशेष व्यंजन, जिसमें नीम के फूल (कड़वा — दुख), कच्चा आम (खट्टा — आश्चर्य), गुड़ (मीठा — खुशी), हरी मिर्च (तीखा — गुस्सा), नमक (नमकीन — भय) और इमली (खट्टा — घृणा) होती है। सभी स्वाद एक साथ खाना जीवन के सभी अनुभवों को स्वीकार करने का प्रतीक है।

पंचांग श्रवण — वार्षिक हिंदू पंचांग का वाचन — उगादि की सुबह की एक प्रिय परंपरा है। पुजारी नए वर्ष की भविष्यवाणियां — वर्षा, फसल, राजनीतिक घटनाएं — बताते हैं।

उगादि कैसे मनाएं

1

सूर्योदय से पहले तेल स्नान (अभ्यंग स्नान)

सूर्योदय से पहले परिवार के सदस्य अनुष्ठानिक तेल स्नान करते हैं — तिल का तेल शरीर और बालों में लगाकर स्नान किया जाता है। नव वर्ष के आरंभ में यह शुद्धि और शुभता का प्रतीक है।

2

आम के पत्तों की तोरण (द्वार सजावट)

ताजे आम के पत्तों की माला बनाकर घर के द्वार पर लगाई जाती है। हिंदू परंपरा में आम के पत्ते शुभ माने जाते हैं और नव वर्ष में घर में सकारात्मक ऊर्जा का स्वागत करते हैं।

3

उगादि पचड़ी — छह स्वाद का व्यंजन

उगादि पचड़ी सभी परिवारजनों द्वारा खाई जाती है। इसमें नीम के फूल, कच्चा आम, गुड़, हरी मिर्च, नमक और इमली होती है — छहों स्वाद और जीवन के सभी अनुभवों का प्रतीक।

4

पूजा और नए वस्त्र

परिवार घर या मंदिर में विशेष उगादि पूजा करता है। नए वस्त्र पहने जाते हैं — नई शुरुआत का प्रतीक। बड़ों का आशीर्वाद लिया जाता है।

5

पंचांग श्रवण — पंचांग वाचन

मंदिरों में पुजारी वार्षिक पंचांग का वाचन करते हैं — नए वर्ष का नाम, उसका शासक ग्रह और वर्ष की भविष्यवाणियां बताते हैं। यह परंपरा कृषि और जीवन की योजनाओं का मार्गदर्शन करती है।

उगादि के व्यंजन और उत्सव भोजन

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उगादि पचड़ी की सामग्री

  • नीम के फूल (कड़वे)
  • कच्चे आम के टुकड़े (खट्टे)
  • गुड़ (मीठा)
  • हरी मिर्च (तीखी)
  • नमक (नमकीन)
  • इमली का रस (खट्टा)
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उत्सव की मिठाई और व्यंजन

  • बोब्बट्लू / पुरण पोली (मीठी दाल रोटी)
  • पुलिहोरा (इमली चावल)
  • परमान्नम (मीठी खीर)
  • पेसरट्टू (हरे मूंग का डोसा)
  • मामिदिकाया पप्पू (कच्चे आम की दाल)

ℹ️ व्यंजन और परंपराएं क्षेत्र के अनुसार भिन्न हो सकती हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उगादि 2026 में 29 मार्च (रविवार) को है। यह चैत्र शुक्ल प्रतिपदा पर मनाया जाता है — हिंदू चंद्र कैलेंडर के अनुसार चैत्र माह के शुक्ल पक्ष का पहला दिन।

स्रोत विवरण

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डेटा स्रोत

सत्यापित क्षेत्रीय स्रोत · तेलुगु और कन्नड़ पंचांगम · शालिवाहन शक कैलेंडर

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संपादकीय समीक्षा

6 जून 2026

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सत्यापन स्थिति

सत्यापित क्षेत्रीय डेटा

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क्षेत्र / स्थान

आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, भारत

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