
पंगुनि उत्तिरम 2026: भगवान मुरुगन का दिव्य विवाह पर्व
पंगुनि उत्तिरम एक प्रमुख तमिल पर्व है, जो तमिल माह पंगुनि (मार्च–अप्रैल) में पूर्णिमा के साथ उत्तिर (उत्तराफाल्गुनी) नक्षत्र के संयोग पर मनाया जाता है। यह पर्व भगवान मुरुगन के देवयानी और वल्ली से दिव्य विवाह का उत्सव है और तमिल भक्ति-परंपरा में सर्वाधिक पावन दिनों में से एक माना जाता है। तमिलनाडु भर के मुरुगन मंदिरों में विशेष अभिषेक, कावड़ी जुलूस और तिरुकल्याणम समारोह आयोजित होते हैं।
मार्च–अप्रैल 2026 में अपेक्षित · सटीक तिथि आधिकारिक घोषणा के बाद अपडेट की जाएगी · सत्यापित क्षेत्रीय डेटापंगुनि उत्तिरम
✓ सत्यापित क्षेत्रीय डेटापर्व तिथि
मार्च–अप्रैल 2026 में अपेक्षित · चंद्र-आधारित (पंगुनि पौर्णमी + उत्तिर नक्षत्र)
तिथि
तमिल माह पंगुनि की पूर्णिमा
नक्षत्र
उत्तिर (उत्तराफाल्गुनी)
क्षेत्र
तमिलनाडु · दक्षिण भारत
प्रमुख मंदिर
पलानी, तिरुचेंदूर, स्वामीमलाई, तिरुपरणकुंद्रम
पंगुनि उत्तिरम के बारे में
पंगुनि उत्तिरम तमिल माह पंगुनि में तब मनाया जाता है जब पूर्णिमा और उत्तिर नक्षत्र एक साथ पड़ते हैं। यह संयोग तमिल शैव और वैष्णव दोनों परंपराओं में अत्यंत शुभ माना जाता है। इस पर्व पर भगवान मुरुगन के दो विवाहों का उत्सव मनाया जाता है — देवराज इंद्र की पुत्री देवयानी के साथ तिरुपरणकुंद्रम में और जनजातीय कन्या वल्ली के साथ स्वामीमलाई में। पलानी, तिरुचेंदूर, स्वामीमलाई, तिरुपरणकुंद्रम जैसे प्रमुख मुरुगन तीर्थों पर लाखों श्रद्धालु उमड़ते हैं।
पंगुनि उत्तिरम का महत्व
पंगुनि उत्तिरम का धार्मिक केंद्र भगवान मुरुगन के दिव्य विवाह हैं। शैव पुराणों के अनुसार, इसी दिन भगवान मुरुगन ने तिरुपरणकुंद्रम की पवित्र पहाड़ी पर देवयानी से विवाह किया था और स्वामीमलाई में वल्ली से मिलन हुआ था। ये दिव्य मिलन ब्रह्मांडीय पुरुष-तत्व और सर्वव्यापी स्त्री-शक्ति के संगम का प्रतीक हैं। मंदिरों में तिरुकल्याणम (देव-विवाह) समारोह वैदिक मंत्रों, माला-विनिमय और पवित्र अग्नि के साथ आयोजित होते हैं।
यह दिन वैष्णव परंपराओं में भी महत्वपूर्ण है। श्रीरंगम और अन्य वैष्णव मंदिरों में इस दिन भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी के दिव्य विवाह का उत्सव मनाया जाता है। कुछ परंपराओं में यह दिन भगवान शिव की जटाओं से गंगा के अवतरण से भी जुड़ा है। ये सभी पवित्र आख्यान मिलकर पंगुनि उत्तिरम को दिव्य प्रेम, ब्रह्मांडीय व्यवस्था और मिलन की पावनता का पर्व बनाते हैं।
कावड़ी अट्टम — सजी-धजी कावड़ी को कंधे पर उठाकर मुरुगन मंदिर तक नंगे पैर चलना — पंगुनि उत्तिरम भक्ति की सबसे दृश्यमान अभिव्यक्ति है। भक्त अपनी मनोकामना पूरी होने पर या पहले से लिए गए संकल्प के अनुसार कावड़ी उठाते हैं। यह साधना भगवान मुरुगन के प्रति पूर्ण समर्पण का प्रतीक है और स्वास्थ्य, समृद्धि और संतान के लिए वरदान देने वाली मानी जाती है।
✦मुरुगन के छह धाम
छहों आरुपडई वीडु — तिरुत्तणि, स्वामीमलाई, पलानी, तिरुपरणकुंद्रम, तिरुचेंदूर और पझमुदिर्चोलाई — पंगुनि उत्तिरम पर कई दिनों तक विशेष उत्सव आयोजित करते हैं।
परंपराएं और अनुष्ठान
ब्रह्म मुहूर्त में मंदिर अभिषेक
भक्त सूर्योदय से पहले मुरुगन मंदिरों में पहुंचकर विशेष पंगुनि उत्तिरम अभिषेक में भाग लेते हैं। दूध, गुलाबजल, चंदन, शहद और गंगाजल से देव-प्रतिमा का अभिषेक किया जाता है, जो दिन की सबसे पावन पूजा मानी जाती है।
कावड़ी जुलूस
संकल्प लेने वाले भक्त मोर-पंखों, फूलों और मुरुगन की प्रतिमाओं से सजी कावड़ी कंधों पर उठाकर मंदिर तक नंगे पैर चलते हैं। कावड़ी वाहक कई दिनों तक उपवास रखते हैं और "वेल वेल मुरुगनुक्कु अरोहरा" का जाप करते हुए यात्रा करते हैं।
तिरुकल्याणम (दिव्य विवाह समारोह)
दिन का मुख्य अनुष्ठान तिरुकल्याणम है, जिसमें भगवान मुरुगन की उत्सव-प्रतिमाओं का देवयानी और वल्ली से विधिवत विवाह कराया जाता है। यह समारोह वैदिक मंत्रों, माला-विनिमय और पवित्र अग्नि के साथ पारंपरिक तमिल हिंदू विवाह की तरह आयोजित होता है।
थेर (मंदिर रथ) यात्रा
प्रमुख मंदिरों में देव-प्रतिमा को सजे हुए लकड़ी के रथ पर बिठाकर मंदिर की गलियों में निकाला जाता है। हजारों भक्त रथ को खींचते हैं और नादस्वरम, ढोल और पुष्प-सज्जा के साथ यह जुलूस निकलता है।
पाल कुडम भेंट और संकल्प पूर्ति
पूर्व संकल्प लेने वाले भक्त मंदिर में दूध से भरे पाल कुडम (मिट्टी के घड़े) अर्पित करते हैं और प्रवेश द्वार पर नारियल फोड़ते हैं। फूल, फल और रेशमी वस्त्र भी भेंट किए जाते हैं। कई भक्त इस दिन केवल फलाहार करते हैं।
प्रसाद और पर्व भोजन
मंदिर प्रसाद
- •पाल (अभिषेक का मीठा दूध)
- •पंचामृतम (केला, गुड़, शहद, घी और इलायची का मिश्रण)
- •पोंगल प्रसादम (मंदिर का मीठा चावल)
- •कोझुकट्टै (भाप से पके चावल के पकौड़े)
व्रत और उपवास भोजन
- •फल (केला, आम, कटहल — मौसम के अनुसार)
- •नारियल (अर्पण के रूप में)
- •गन्ने के टुकड़े (अर्पित और वितरित)
- •कावड़ी वाहक व्रत के दौरान केवल दूध और फल ग्रहण करते हैं
ℹ️ व्यंजन और परंपराएं क्षेत्र के अनुसार भिन्न हो सकती हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
स्रोत विवरण
डेटा स्रोत
सत्यापित क्षेत्रीय स्रोत · तमिल पंचांग (पंगुनि माह, पौर्णमी + उत्तिर नक्षत्र)
संपादकीय समीक्षा
6 जून 2026
सत्यापन स्थिति
सत्यापित क्षेत्रीय डेटा
क्षेत्र / स्थान
तमिलनाडु, दक्षिण भारत



