
मकर संक्रांति 2027: तिथि, महत्व और परंपराएं
मकर संक्रांति सूर्य के मकर राशि में प्रवेश का पर्व है। यह हिंदू सौर पंचांग पर आधारित है और प्रतिवर्ष 14 जनवरी को पड़ती है। 2027 में मकर संक्रांति 14 जनवरी (गुरुवार) को है। इसे भारत भर में अलग-अलग नामों से — उत्तरायण, पोंगल, लोहड़ी, माघ बिहू — मनाया जाता है।
DivineAPI से लाइव डेटा · 2026मकर संक्रांति 2026
मकर संक्रांति के बारे में
मकर संक्रांति उन कुछ हिंदू त्योहारों में से एक है जो सौर पंचांग पर आधारित है। "मकर" अर्थात मकर राशि और "संक्रांति" अर्थात परिवर्तन या प्रवेश। यह दिन सूर्य के मकर राशि में प्रवेश और उत्तरायण के आरंभ का उत्सव है। इस दिन से दिन बड़े होने लगते हैं।
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मकर संक्रांति का महत्व
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मकर संक्रांति हिंदू त्योहारों में अनूठी है — यह सौर पंचांग पर आधारित है, इसलिए प्रतिवर्ष 14 जनवरी को पड़ती है।
यह त्योहार उत्तरायण के आरंभ का प्रतीक है — वह शुभ काल जब सूर्य उत्तर दिशा की ओर बढ़ता है और दिन बड़े होने लगते हैं।
महाभारत में भीष्म पितामह की कथा इस दिन के महत्व को दर्शाती है।
मकर संक्रांति कैसे मनाएं
पवित्र स्नान
गंगा, यमुना या किसी पवित्र नदी में स्नान करें। प्रयागराज में मकर संक्रांति पर विशाल स्नान पर्व होता है।
तिल-गुड़ दान और वितरण
तिल के लड्डू और तिल-गुड़ बनाएं और पड़ोसियों को दें। "तिल गुल घ्या, गोड गोड बोला" — तिल-गुड़ लो और मीठा बोलो।
दान करें
मकर संक्रांति दान के लिए अत्यंत शुभ दिन है। तिल, कंबल और अन्न दान करें।
पतंग उड़ाएं
गुजरात में उत्तरायण पर विश्व प्रसिद्ध पतंग उत्सव होता है। उत्तर भारत में भी पतंगबाजी की परंपरा है।
खिचड़ी (उत्तर भारत)
उत्तर प्रदेश और बिहार में मकर संक्रांति को "खिचड़ी" भी कहते हैं। इस दिन दाल-चावल की खिचड़ी पकाकर दान की जाती है।
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क्षेत्रीय परंपराएं और व्यंजन
पारंपरिक व्यंजन
- •तिल-गुड़ (तिल और गुड़ की मिठाई)
- •तिल के लड्डू
- •रेवड़ी
- •गजक
- •खिचड़ी (उत्तर प्रदेश)
- •पोंगल चावल (तमिलनाडु)
- •घी और गुड़
क्षेत्रीय नाम
- •उत्तरायण — गुजरात
- •लोहड़ी — पंजाब
- •पोंगल — तमिलनाडु
- •माघ बिहू — असम
- •मकर संक्रांति — उत्तर भारत
- •खिचड़ी — पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार
ℹ️ परंपराएं क्षेत्र के अनुसार भिन्न होती हैं। अंतिम सामग्री प्रकाशन से पहले समीक्षा की जाएगी।
सामान्य प्रश्न
स्रोत विवरण
तिथि स्रोत
हिंदू सौर पंचांग — सूर्य का मकर राशि में प्रवेश
अंतिम समीक्षा
5 जून 2026
सत्यापन स्थिति
सौर पंचांग की निश्चित तिथि। पुण्य काल DivineAPI सत्यापन लंबित।
लागू क्षेत्र
संपूर्ण भारत (विभिन्न नामों से)

